~  ध्रुव हर्ष

ये नाम किसी मिथक के पन्नों के पात्र का गवहीं या यूँ ही लोगों के मुँह कहा जाने वाला नाम नहीं था, और न ही, मैंने उपन्यासकार महाश्वेता देवी की लेखनी से प्रेरित होकर कोई ऐसा नाम गढ़ने की ज़बरदस्ती कोशिश की थी। फिर द्रोपदी को मै दुपदी कैसे बना पाता।

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अब सुबह तो होगी, पर शायद अब वह जल्दी उठने की चाह नहीं होगी,
तैयार तो हम अब भी होंगे, पर शायद बस का वेट करने की जल्दी नहीं होगी,
जल्दी तो अब भी होगी, पर गेट बंद हो जाने की चिंता नहीं होगी,
पढाई तो अब भी होगी, पर वो प्यार से पढ़ने वाली टीचर्स नहीं होंगी।

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